इज़हार.

दिल पर हज़ार बंदिशे।
कैसे करु इज़हार तुमसे।
मिलना मुनाशिब नहीं अब शहर की चौक पर.
लाखो खड़े दिल के अरमान पर खंज़र लिए,
कैसे करू इज़हार – ऐ- मोहब्बत.

#अवध.

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