अश्क

आँखों से टपका कर अश्क तुझे रोना तो आ गया.
तुम बताओ ग़ालिब आज हम रोए किस के लिए.

किस के लिए बहाये हम अपने आँखों से नीर की प्यास..
कोई नहीं सुनता अवध हम रोए किस के लिए.

वक़्त की झुर्रिया हम दोनों के कोमल मन को झुलसाती।
तुम बताओ नफीश हम इश्क़ करे किस के लिए.

अवधेश कुमार राय “अवध”

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