रवानी दे

ऐ खुदा मेरे शहर को वो पुरानी रवानी दे.

बेचैन हमारे वाशिंदो को जवानी रवानी द.

हम जानते खिदमत में तेरे शहर के शौक़ीन।

मुझे याद आने वाली वह कहानी रवानी दे.

यहाँ पर बदल गए तेवर आज तेरे सरकार।

गुजरती सरकार आने वाले को सलामी रवानी दे।

बोझील नज़रों से वो कर रहे कुर्शी को अलविदा।

जाते -जाते उनको नजरान दीवानी – रवानी दे।

तन को ढक सके कोई ऐसी चादर दे सरकार।

ओढ़ना – बिछाना अब न जनता को ऎसी कोई कहानी रवानी दे।

ऑंखें बूझ चुकी यहाँ पर आंशु की सिलवटों में.

सियासत किस -किस को झूठी जवानी-रवानी दे।

अवधेश कुमार राय अवध

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